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वैसे तो मैंने कभी हिंदी में इस तरह से कुछ लिखा नहीं है. हिंदी में पढ़ा बहुत है. हिंदी से गुजराती में अनुवाद का
काम भी किया है. गुजराती साप्ताहिक साधना में काम करता था तब पांचजन्य के बहोत से लेखो का गुजराती में
अनुवाद किया था पर हिंदी में ज्यादा कुछ लिखा नहीं और आज से हिंदी में लिखना शुरू कर रहा हु. अगर
कुछ भाषाकिय भूल हो तो सुजाव मिलेगा ऐसी अपेक्षा रखता हु.
दिव्याजी का बहोत बहोत धन्यवाद. इन्ही की वजह से मुझे हिंदी में लिखने की प्रेरणा मिली है. और सुरेश
चिपलूनकर का भी आभार जिन्होंने मुझे उनके एक 'लेख सोनिया गाँधी के बारे में आप कितना जानते हो?' का
गुजराती में अनुवाद करने की अनुमति दी. मेरे सभी हिंदी भाषी मित्रो का तहे दिल से आभार. आप सब मेरा
होसला बढ़ाते रहेना और मय गुजराती अस्मिता को राष्ट्र भाषा में आपके सामने लाता रहूँगा.
जय हिंद
वन्दे मातरम
